ग्रंथसार
सरयू की भोर से आरम्भ हुई यात्रा उस आश्रम तक पहुँची, जहाँ की भूमि कामदेव के ‘अनंग’ हो जाने की कथा सँजोए थी।
बालकाण्ड · सर्ग 23
सरयू तट की पहली रात