ग्रंथसार
जहाँ कभी धन-धान्य से भरे दो जनपद थे, वहाँ अब वन के भयावह स्वर गूँजते थे—उस उजाड़ के पीछे एक पुराना इतिहास था।
बालकाण्ड · सर्ग 24
सूनी भूमि