ग्रंथसार
जो रामचरित अब तक सुना गया था, वह अब महर्षि की एकाग्र दृष्टि में हथेली पर रखे आँवले की तरह स्पष्ट होने लगा।
बालकाण्ड · सर्ग 3
समग्र दर्शन