ग्रंथसार
यज्ञ की रक्षा का दायित्व पूरा हुआ, तो मिथिला का निमंत्रण मिला—जहाँ एक ऐसा धनुष पूजित था, जिस पर बड़े-बड़े बलवान भी प्रत्यंचा नहीं चढ़ा सके थे।
बालकाण्ड · सर्ग 31
मिथिला की ओर