ग्रंथसार
अमर होने की आशा में समुद्र मथा गया, पर उसकी गहराइयों से पहले ऐसा विष उठा कि मथने वालों के प्राण ही संकट में पड़ गए।
बालकाण्ड · सर्ग 45
समुद्र-मन्थन