ग्रंथसार
वह आश्रम केवल सूना नहीं था—उसकी निस्तब्धता में एक शाप, कठोर तपस्या और मुक्ति का निश्चित विधान छिपा था।
बालकाण्ड · सर्ग 48
सूना आश्रम