ग्रंथसार
यज्ञ के लिए ले जाए जा रहे शुनःशेप को अपने मामा के आश्रम में आश्रय मिला—पर उसकी रक्षा का उपाय महर्षि विश्वामित्र के अपने पुत्रों की कठोर परीक्षा बन गया।
बालकाण्ड · सर्ग 62
शुनःशेप की मुक्ति और विश्वामित्र की तपस्या