ग्रंथसार
मेनका के आकर्षण से मुक्त होकर भी महर्षि विश्वामित्र के सामने एक प्रश्न शेष था—क्या वे अपनी इन्द्रियों पर पूर्ण विजय पा सके थे?
बालकाण्ड · सर्ग 63
विश्वामित्र की तपस्या, मेनका का आगमन और काम-विजय का संकल्प