ग्रंथसार
अग्नि के सम्मुख माता सीता का हाथ भगवान श्रीराम को सौंपते हुए महाराज जनक ने उन्हें केवल अपनी पुत्री नहीं, जीवन की सहधर्मचारिणी अर्पित की।
बालकाण्ड · सर्ग 73
चारों राजकुमारों का पाणिग्रहण संस्कार