ग्रंथसार
किष्किन्धा की ओर बढ़ते योद्धाओं को मार्ग में ऐसा तपोवन मिला, जहाँ की अदृश्य महिमा के आगे उनके हाथ श्रद्धा से जुड़ गए।
किष्किन्धाकाण्ड · सर्ग 13
किष्किन्धा की ओर प्रस्थान