ग्रंथसार
श्री हनुमान ने तारा को पुत्र और कर्तव्य का सहारा देना चाहा, पर शोकाकुल तारा के लिए उस क्षण पति के समीप रहना ही सबसे बड़ा आश्रय था।
किष्किन्धाकाण्ड · सर्ग 21
हनुमान जी द्वारा तारा को सांत्वना