ग्रंथसार
जिस विजय से सुग्रीव को राज्य मिलना था, उसी विजय के सामने खड़े होकर वे अब अपने जीवन को धिक्कार रहे थे।
किष्किन्धाकाण्ड · सर्ग 24
सुग्रीव और तारा का विलाप तथा श्रीराम का सान्त्वना