ग्रंथसार
प्रस्रवण पर्वत पर आश्रय तो मिल गया, पर माता सीता के बिना भगवान श्रीराम के हृदय को विश्राम कहाँ था!
किष्किन्धाकाण्ड · सर्ग 27
प्रस्रवण पर्वत पर वर्षा ऋतु और श्रीराम का विरह