ग्रंथसार
मित्र का मौन भी कभी-कभी सबसे बड़ा स्मरण होता है—श्री हनुमान ने सुग्रीव को उसी मौन के पीछे छिपा कर्तव्य दिखाया।
किष्किन्धाकाण्ड · सर्ग 29
हनुमान द्वारा सुग्रीव को कर्तव्य का स्मरण