ग्रंथसार
पहली भेंट में श्री हनुमान ने दोनों वीरों का तेज पहचाना, और भगवान श्रीराम ने उनकी वाणी में छिपा ज्ञान, संयम और दूत-कौशल।
किष्किन्धाकाण्ड · सर्ग 3
हनुमान जी और श्रीराम का प्रथम मिलन