ग्रंथसार
तारा की विनम्र वाणी ने धनुष की टंकार से काँपते राजभवन में संवाद का मार्ग खोल दिया—पर मित्र के कर्तव्य का प्रश्न अब भी सामने था।
किष्किन्धाकाण्ड · सर्ग 33
लक्ष्मण का किष्किन्धा में प्रवेश और तारा द्वारा उनका क्रोध-शमन