ग्रंथसार
राजसी वैभव के साथ चले सुग्रीव जब भगवान श्रीराम के सामने पहुँचे, तो मित्रता के साथ कर्तव्य की बात भी सामने आई।
किष्किन्धाकाण्ड · सर्ग 38
सुग्रीव का श्रीराम के पास प्रस्थान और मिलन