ग्रंथसार
अंधकार के भीतर चमकते उस स्वर्णमय वन का रहस्य केवल उसके वैभव में नहीं, उसकी रक्षा करने वाली तपस्विनी के परिचय में छिपा था।
किष्किन्धाकाण्ड · सर्ग 51
ऋक्ष-बिल का दिव्य वैभव और तपस्विनी के दर्शन