ग्रंथसार
जिस दुर्गम बिल से जीवित लौटना संभव नहीं था, वहाँ वानरों के लिए तपस्विनी स्वयंप्रभा का अनुग्रह ही मुक्ति का मार्ग बना।
किष्किन्धाकाण्ड · सर्ग 52
ऋक्षबिल से निष्क्रमण और स्वयं प्रभा का अनुग्रह