ग्रंथसार
जिन वानरों को देखकर सम्पाती को भोजन की आशा हुई थी, उन्हीं के मुख से जटायु का नाम सुनते ही उसकी भूख भाई के शोक में बदल गई।
किष्किन्धाकाण्ड · सर्ग 56
सम्पाती द्वारा जटायु का नाम श्रवण