ग्रंथसार
जिस आकाशचारी को सुपार्श्व अपना आहार समझ रहा था, उसी के साथ माता सीता के हरण का रहस्य उसके सामने से गुजर रहा था।
किष्किन्धाकाण्ड · सर्ग 59
सम्पाती द्वारा सुपार्श्व के वृत्तान्त का वर्णन