ग्रंथसार
सूर्य को छू लेने के अभिमान से आरम्भ हुई उड़ान में सम्पाती ने अपने पंख खो दिए—पर अपने छोटे भाई को बचा लिया।
किष्किन्धाकाण्ड · सर्ग 61
सम्पाती द्वारा सूर्य की ओर उड़ान और पंख जलने की कथा