जाम्बवान द्वारा हनुमान जी को उनके असीम बल का स्मरण
जब अपार सागर के तट पर सभी वानर वीर असमंजस में थे, तब वयोवृद्ध जाम्बवान ने मौन बैठे पवनपुत्र श्री हनुमान को उनके भूले हुए असीम तेज और शौर्य का स्मरण कराया।
हिन्दी कथा
जाम्बवान द्वारा हनुमान जी को उनके असीम बल का स्मरण
किष्किन्धाकाण्ड · सर्ग 66
जाम्बवान द्वारा हनुमान जी को उनके असीम बल का स्मरण