ग्रंथसार
समुद्र के उस पार पहुँचने के लिए केवल अपार बल नहीं, ऐसा विवेक भी चाहिए था जो सत्कार, परीक्षा और संकट का भेद पहचान सके।
सुन्दरकाण्ड · सर्ग 1
हनुमान जी का समुद्र-लंघन