ग्रंथसार
चन्द्रमा के उजाले में अशोकवाटिका का वह दृश्य खुला—विकराल राक्षसियों के घेरे में बैठी थीं माता सीता, जिनका मन उस पहरे से बहुत दूर भगवान श्रीराम में लगा था।
सुन्दरकाण्ड · सर्ग 17
अशोकवाटिका में राक्षसी पहरेदारों का दर्शन