ग्रंथसार
रावण अपनी समूची संपदा सामने रख रहा था, पर माता सीता के लिए वह वैभव नहीं—उनकी निष्ठा को खरीदने का प्रयास था।
सुन्दरकाण्ड · सर्ग 20
रावण द्वारा सीता जी को प्रलोभन