ग्रंथसार
लंका के द्वार पर पड़ा एक संयमित प्रहार उसकी रक्षिका के लिए समूचे राक्षसकुल पर आने वाले संकट का संकेत बन गया।
सुन्दरकाण्ड · सर्ग 3
लंका की अधिष्ठात्री देवी लंकिनी की पराजय