ग्रंथसार
माता सीता मिल गई थीं, पर अब श्री हनुमान के सामने ऐसी कठिनाई थी जिसे केवल बल से नहीं, सही समय पर सही वचन बोलकर सुलझाया जा सकता था।
सुन्दरकाण्ड · सर्ग 30
हनुमान जी का विचार और सम्भाषण का निश्चय