ग्रंथसार
जिस वाणी ने माता सीता के हृदय में आशा जगाई, उसी के वक्ता को देखकर वे भय और विस्मय से व्याकुल हो उठीं।
सुन्दरकाण्ड · सर्ग 32
सीताजी द्वारा वृक्ष पर हनुमानजी का दर्शन