ग्रंथसार
विश्वास की कसौटी पर खड़े श्री हनुमान को अब केवल संदेश नहीं, अपने प्रभु की पहचान भी देनी थी।
सुन्दरकाण्ड · सर्ग 35
हनुमान जी द्वारा श्री राम के स्वरूप और गुणों का वर्णन