ग्रंथसार
एक कौए के अपराध की स्मृति और वस्त्र में सँभाली हुई चूड़ामणि—माता सीता ने इन्हीं में अपनी पहचान, पीड़ा और विश्वास सौंप दिया।
सुन्दरकाण्ड · सर्ग 38
सीता का अभिज्ञान: काकासुर का वृत्तांत और चूड़ामणि का समर्पण