ग्रंथसार
लंका का वैभव सामने था, पर श्री हनुमान की दृष्टि उस चमक के भीतर छिपे प्रत्येक मार्ग, प्रहरी और भवन को परख रही थी।
सुन्दरकाण्ड · सर्ग 4
हनुमान जी द्वारा लंका नगरी का अवलोकन