ग्रंथसार
विदा की उस घड़ी में माता सीता ने केवल पहचान का चिह्न नहीं दिया—अपने शेष जीवन की सीमा और मिलन की अंतिम आशा भी सौंप दी।
सुन्दरकाण्ड · सर्ग 40
सीताजी का अंतिम संदेश और हनुमान जी का आश्वासन