ग्रंथसार
रावण ने एक वानर को बाँधने के लिए अस्सी हजार किंकर भेजे—पर अशोकवाटिका के तोरण पर खड़े श्री हनुमान का बल अभी लंका ने देखा ही कहाँ था!
सुन्दरकाण्ड · सर्ग 42
अशोक वाटिका के विध्वंस की सूचना और किंकरों की रवानगी