ग्रंथसार
जिस राजकुमार के रणकौशल की श्री हनुमान ने भी सराहना की, उसी का बढ़ता पराक्रम उसके वध का कारण बन गया।
सुन्दरकाण्ड · सर्ग 47
अक्षकुमार का वध