ग्रंथसार
चाँदनी में लंका के अनगिनत रूप दिखाई दे रहे थे, पर श्री हनुमान की आँखें जिस एक रूप को खोज रही थीं, वह कहीं नहीं था।
सुन्दरकाण्ड · सर्ग 5
लंका में हनुमानजी का रात्रि-भ्रमण और सीता-खोज