ग्रंथसार
पूँछ पर अग्नि धधक रही थी, पर श्री हनुमान को उसका स्पर्श हिम जैसा शीतल क्यों लग रहा था?
सुन्दरकाण्ड · सर्ग 53
हनुमान जी की पूँछ में अग्नि और माता सीता की प्रार्थना