ग्रंथसार
जिस अग्नि से लंका काँप उठी थी, उसी को देखकर श्री हनुमान का हृदय काँप गया—कहीं माता सीता को भी हानि तो नहीं पहुँची?
सुन्दरकाण्ड · सर्ग 55
हनुमान जी की चिंता और सीता जी की कुशलता का ज्ञान