ग्रंथसार
विरह से क्षीण माता सीता के भीतर ऐसा अटूट धर्मबल था कि श्री हनुमान ने रावण के विनाश में भगवान श्रीराम को निमित्तमात्र बताया।
सुन्दरकाण्ड · सर्ग 59
हनुमान द्वारा सीताजी की विरह-दशा और पातिव्रत का वर्णन