ग्रंथसार
जिस मधुवन में बिना अनुमति कोई प्रवेश नहीं कर सकता था, वहाँ आज सफल होकर लौटे वानरों का उल्लास किसी के रोके नहीं रुक रहा था।
सुन्दरकाण्ड · सर्ग 61
मधुवन में वानरों का उल्लास