ग्रंथसार
मधुवन में विजय का उल्लास इतना प्रबल हो उठा कि उसके रक्षक दधिमुख भी युवराज अंगद के सामने टिक न सके।
सुन्दरकाण्ड · सर्ग 62
मधुवन में दधिमुख की पराजय