ग्रंथसार
स्वर्ण और रत्नों से जगमगाते उस अंतःपुर में सुख की कोई कमी न थी—पर श्री हनुमान की दृष्टि उस एक साध्वी को खोज रही थी, जिसका सुख छीन लिया गया था।
सुन्दरकाण्ड · सर्ग 9
हनुमान जी का रावण के अंतःपुर में प्रवेश