ग्रंथसार
राघव के राज्याभिषेक के उपरांत जब दिशा-दिशा से ब्रह्मर्षि अयोध्या पधारे, तब लंका-विजय की उस गूढ़ कथा का द्वार खुला जिसे स्वयं श्रीराम भी विस्मय से सुनने को तत्पर हो उठे।
उत्तरकाण्ड · सर्ग 1
महर्षियों का अयोध्या आगमन