ग्रंथसार
आइए, महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित इस पावन रामायण के श्रवण और पाठ से प्राप्त होने वाले अनंत कल्याणकारी फलों का श्रवण करें।
उत्तरकाण्ड · सर्ग 111
रामायण-श्रवण का दिव्य फल और माहात्म्य