ग्रंथसार
सुनिए उस विचित्र प्रसंग की पावन कथा, जब रावण के भय से देवराज इन्द्र मयूर और यमराज काक बन गए थे।
उत्तरकाण्ड · सर्ग 18
राजा मरुत्त का यज्ञ और देवों का पशु-पक्षी रूप धारण करना