ग्रंथसार
अहंकार के मद में चूर रावण जब अबलाओं के आंसुओं और अपनी ही बहन के क्रंदन की उपेक्षा करता है, तो उसके विनाश की नींव पड़ जाती है।
उत्तरकाण्ड · सर्ग 24
अपहृत स्त्रियों का शाप और शूर्पणखा का विलाप