ग्रंथसार
युद्ध के उन्माद में जब अपनों पर ही प्रहार हो जाए, तो पश्चाताप और नए संकल्पों का जन्म कैसे होता है, आइए इस प्रसंग को सुनें।
उत्तरकाण्ड · सर्ग 25
शूर्पणखा का विलाप और जनस्थान की स्थापना