ग्रंथसार
सुनिए, जब सहस्रबाहु अर्जुन के कारागार में बंदी बने रावण को छुड़ाने के लिए स्वयं ब्रह्मर्षि पुलस्त्य को महिष्मती नगरी आना पड़ा।
उत्तरकाण्ड · सर्ग 33
महर्षि पुलस्त्य द्वारा रावण की मुक्ति