ग्रंथसार
सुनिए, जब बालपन में सूर्य को फल समझकर झपटने वाले पवनपुत्र पर इंद्र ने वज्र का प्रहार किया, तब तीनों लोकों में कैसा हाहाकार मच गया।
उत्तरकाण्ड · सर्ग 35
हनुमान जी का जन्म और पवनदेव का कोप