ग्रंथसार
श्रीराम के राज्याभिषेक के पश्चात् जब सहयोगियों के विदा होने का समय आया, तो अयोध्या का प्रांगण प्रेम और अश्रुओं से भर गया।
उत्तरकाण्ड · सर्ग 40
वानरों और विभीषण की विदाई